Wednesday, January 18, 2017

सायकिल- पंजे के 'सेक्युलर' गठबंधन का 'कम्युनल पेंच':  चौधरी बनाम मौलाना

उत्तर प्रदेश में सपा-कांग्रेस गठबंधन की  खुल्लम खुल्ला घोषणा में लगातार होती देर चर्चा का विषय है।  सपा के नए नवेले मुखिया अखिलेश और कांग्रेस के अघोषित मुखिया राहुल गाँधी की मुलाकात हुए हफ्ता भर बीत चुका है फिर भी इन दो बहुचर्चित युवाओं की सेल्फी सोशल मिडिया को नसीब न होने से सेक्युलर-सेक्युलर वाला गाना टीवी पर चल नही सका।

सवाल है कि आखिर सायकिल- पंजे का 'पेंच' क्या है जिससे  उत्तर प्रदेश में  बहुप्रतीक्षित सेक्युलर  गठजोड़ का एलान संभव नहीं हो पाया ?

रायबरेली-अमेठी की १० बनाम ४०३  

ड्राइंग रूम पत्रकारों की जमात और दिल्ली बैठ पुरे देश की ख़बर कट-कॉपी-पेस्ट और यू-ट्यूब के सहारे चलाने वाले होनहार खबरची कांग्रेस के नमक का कर्ज अदा करने की होड़ में सायकिल- पंजे का 'पेंच'  गाँधी परिवार की रायबरेली और अमेठी लोकसभाओं के भीतर आने वाली विधानसभाओं पर कांग्रेस की दावेदारी को बता रहे हैं। कांग्रेसी नमक के कर्जदार पत्रकारों का ऐसा मानना है की जन्मजात गांधीवादी राजनीति के लिए  देश में प्रसिद्ध रायबरेली और अमेठी  में भी यदि सभी विधानसभाएं कांग्रेसी कोटे में नहीं टपकी तो इससे प्रियंका- राहुल के कद में बौनापन आएगा। ऐसे होनहार चुनावी पत्रकार चमचे ये भूल जाते हैं कि २०१२ के विधानसभा चुनावों में राहुल-प्रियंका गाँधी के अथक प्रयासों के बाद भी रायबरेली और अमेठी में १० में से कुल २ ही सीटों पर जीत दर्ज कर सकी थी जबकि ८ पर सपा को जीत मिली थी ।

सवाल है कि ३० दशकों से हाशिये पर पड़ी कांग्रेस, उत्तर प्रदेश में  २०१४ के लोकसभा चुनावों में महज २ परम्परागत सीटों -रायबरेली और अमेठी-  पर सिमटने के बाद इस हैसियत में है कि वो प्रदेश की महज १० विधानसभाओं के लिए ४०३ के बड़े आंकड़े को दरकिनार कर सकती है ?

जाट बनाम मुस्लिम: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आर एल डी 

उत्तर प्रदेश में सायकिल- पंजे के सेक्युलर गठबंधन का असली 'पेंच'  है कांग्रेस- सपा का कम्यूनल वोट यानि प्रदेश के १/५ मुस्लिम मतदाता। पश्चिमी   उत्तर प्रदेश के २० जिलों की लगभग १००  विधानसभाओं में मुस्लिम आबादी २५ से ३५ फीसदी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश  में आबादी के लिहाज से लगभग २० फीसदी यानि (१/५) मतदाता जाट हैं जो लगभग ९० विधानसभाओं में चुनाव परिणामों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं।

पश्चिमी  उत्तर प्रदेश में पिछले ५ सालों में छोटे बड़े सैकड़ों संघर्ष जाटों और मुस्लिमों के बीच होते रहे जिसमें सबसे दर्दनाक २०१३ के मुज़फ़्फ़र नगर जिले के कवाल गाँव में हुआ जाट -मुस्लिम दंगा था जिसमें ४५ से अधिक लोग मारे गए और १०० से भी अधिक हताहत हुए।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अजित सिंह की आरएलडी  पार्टी  जाट वोटों पर निर्भर। पश्चिमी  उत्तर प्रदेश में जाट वोटरों को अपने पाले में करने की जुगत में लगी कांग्रेस को अजित सिंह की आरएलडी से गठज़ोड की जरूरत महसूस होती है जबकि सपा इस गठजोड़ को अपने दूसरे सबसे बड़े कोर वोट बैंक मुस्लिम समुदाय की नाराज़गी का ख़तरा नहीं उठाना चाहती।

सपा के सामने उत्तर प्रदेश में  बसपा के मुस्लिम कार्ड का बड़ा खतरा है क्योंकि बसपा ने ४०३ की उम्मीदवारों की लिस्ट में लगभग १०० टिकट मुस्लिमों को दिए हैं। इसलिए  सायकिल- पंजे के सेक्युलर गठबंधन का कम्युनल 'पेंच' वास्तव में चौधरी अजीत सिंह की आरएलडी है।  समस्या प्रदेश के पश्चिम में है, और होनहार खबरची गांधी चश्में लगा कर दिमाग़ी दृष्टिदोष वश उसे पूरब के अमेठी रायबरेली में खोजते गाते घूम रहे हैं।

(Written by Devendra Shukla,associated with Team CVOTER News Service. He is presently heading the Research Desk in DD News)

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